150 साल से बोलीविया में श्वेत ही राष्ट्रपति बनते आ रहे थे, प्राकृतिक संसाधनों लैस होने के बावजूद बोलीविया बेहद पिछड़ा देश था. लोग बेहद कम आय पर गुजारा करने को मजबूर थे. 5% श्वेतों का 80% संपत्ति पर कब्ज़ा हो गया था.
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2006 में बोलीविया ने आदिवासी इवो मोरालेस को राष्ट्रपति चुनकर इतिहास रच दिया, इवो मोरालेस आदिवासी समुदाय से देश के पहले राष्ट्रपति बने. पदभार संभालते ही उन्होंने क्रांतिकारी फैसले किए.
भारत में करना जो सपना लगता, इवो मोरालेस ने बोलीविया में मुफ्त स्वास्थ्य सेवा, मुफ्त शिक्षा और किसान मजदूर के लिए सेवानिवृत्ति के लाभों की व्यवस्था की.
पुरे देश में भूमि सुधार लागू कर भूमिहीनों को भूमि आवंटित की. भूमिहीन किसान बन गए सीधे जाकर फसल मार्किट में बेचने का फ्री लाइसेंस मिला, जिससे मेहंगाई काबू में रही.
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95% आवाम को रसोई गैस, बिजली, इंटरनेट, पानी पर भारी सब्सिडी और आवास योजना में सस्ती दरों पर कर्ज़ उपलब्ध कराया.
यह सब संभव हुआ बोलीविया के प्राकृतिक संसाधनों का राष्ट्रीयकरण करने से, निजी कंपनियों को लात मारकर भगा दिया जो आम जनता को लूट रही थी.
गरीब खुशहाल जीवन जी रहे थे कारण उनके पास ज़मीन थी, सीधे शहर में फसल सब्ज़ी बेचने की आज़ादी. बोलीविया के लोग पहली बार अधिक सेहतमंद अधिक अमीर, अधिक शिक्षित... इवो मोरालेस ने बोलीविया को अब तक के इतिहास में पहली बार मजबूत आर्थिक स्थिति में लाकर खड़ा किया.
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2019 के ओकटुबर महीने के चुनाव में भारी बहुमत से जितने के बावजूद अमेरिका और पूंजीपतियों ने इवो मोरालेस का तख्तापलट कर दिया. और एक श्वेत नेता को सेना ने राष्ट्रपति के पद पर बिठा दिया.
श्वेत राष्ट्रपति वही कर रहा है जो नरेंद्र मोदी भारत में कर रहे हैं. नरेंद्र मोदी को अपवाद नही है, पूरी दुनिया में नरेंद्र मोदी जैसे नेता हैं जो उद्योगपतियों के इशारे पर काम करते हैं लेकिन इतनी चलाखी से की आम जनता को इसकी भनक तक नही लगती कारण वे हिन्दू मुस्लिम में उलझा देते हैं.
जनता सड़कों पर उतर आयी, पूंजीपतियों के कटपुतली राष्ट्रपति को हटना पड़ा. चुनाव हुए और इवो मोरालेस की पार्टी दुबारा सत्ता में आयी. लेकिन राष्ट्रपति का पदभार किसी और नेता ने संभाला कारण तख्ता पलट के बाद इवो मोरालेस देश के बाहर थे. सत्ता में उनकी पार्टी वापसी होते ही इवो मोरालेस देश वापस आए और अपनी क्रांतिकारी नीतियों को दुबारा लागू किया।
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संकलन: राकेश देवडे़ बिरसावादी
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