ना लोकसभा ना विधानसभा सबसे ऊंची ग्राम सभा : सुप्रीम कोर्ट

माननीय सुप्रीम कोर्ट ने वेदांता बनाम उड़ीसा 2013 के ऐतिहासिक निर्णय में कहा था- "ना लोकसभा ना विधानसभा सबसे ऊंची ग्राम सभा"
क्या कलेक्टर साहब सुप्रीम कोर्ट से भी बड़े हो गए हैं,जो ग्राम सभा द्वारा पारित ठहराव प्रस्ताव को नहीं मान रहे हैं। विदित है संसद द्वारा बनाया गया कानून हो या सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया गया निर्णय हो दोनों का महत्व बराबर होता है यानी लोकसभा विधानसभा द्वारा पारित कानून का महत्व ठीक उसी तरह होगा जिस तरह सुप्रीम कोर्ट का निर्णय है। निर्णय को आदेश माना जा सकता हैं। यदि यह मामला गंभीरता से उठाया जाए तो कलेक्टर साहब को संविधान की अवमानना में जेल हो सकती है।
: राकेश देवडे़ बिरसावादी

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