आलीराजपुर का विस्मृत क्रांतिकारी – छीतू किराड़ -- आलीराजपुर विद्रोह 1871
छीतू किराड़ सोरवा गाँव के निवासी थे I
आलीराजपुर की जनता की मांग है कि सोरवा में छीतू किराड़ की मूर्ति स्थापित कर उन्हें सम्मान दिया जाए , यह करने में क्षेत्र का गौरव होगा I
सोरवा में पुराने थाने का भवन और प्राचीन पत्थरों से निर्मित चारदीवारी भी हैं , इस बाउंडरी वाल में कुछ मूर्तियों भी लगी होने से इसका ऐतिहासिक महत्त्व भी हैं I
शासकीय जगह उपलब्ध हैं और छीतू किराड़ की मूर्ति स्थापित कर यहाँ एक संग्रहालय निर्मित किया जाकर हम इस क्रांतिकारी को सम्मान प्रदान कर सकते हैं I
आलीराजपुर स्टेट में भी 1870 के आसपास स्थानीय राजवंश और अंग्रेजों की सांठ गाँठ से आदिवासी भील – भिलाला समुदाय पर शोषण और दमन जब जोरों पर था तब सोरवा क्षेत्र के छीतू किराड़ और समीपस्थ गाँवों के प्रमुख पटेल और तडवी ने इसका विरोध किया I पहले तो राजा को उनके कारिंदों की मनमानी , अत्याचार की जानकारी देते हुए न्याय माँगा I जब सुनवाई नहीं हुई तो विद्रोह कर दिया I यह विद्रोह अंग्रेजों द्वारा राजा के माध्यम से किए जा रहे शोषण के विरुद्ध था I
छीतू किराड़ ने जबरन लागू मनमानी करों की बेरहमी से वसूली के खिलाफ़ था I
छीतू किराड़ ने अपने साथियों के साथ रोबिन हुड शैली में कार्य करते हुए गरीब आदिवासियों की मदद की I
इस आदिवासी क्रांतिकारी को इतिहास में भुला दिया गया I इसके बारे में आज भी कुछ खोजी व्यक्ति – रोहित पडियार और उनके साथी दस्तावेजों का संकलन कर रहे हैं ताकि छीतू किराड़ को क्रांतिकारी सिद्ध कर सकें I
: राकेश देवडे़ बिरसावादी
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