विश्व के आदिवासी एक हो-राकेश देवडे़ बिरसावादी

क्रांतिकारी जोहार जय बिरसा सगाजनो💪 🙏
"हमारे पुरखे (मालिक टंट्या भील दादा, भगवान बिरसा मुंडा,रेंगू कोरकू दादा,खाज्या नायक, भीमा नायक, सिद्धू-कान्हू, शंकर शाह रघुनाथ शाह, राघोजी भांगरे,रानी दुर्गावती सहित अनगिनत शहिद ) जल जंगल जमीन और आने वाली पीढ़ी के स्वर्णिम भविष्य के लिए पागल थे,वो स्वशासन चाहते थे,हर ज़ुल्म और शोषण के खिलाफ आवाज उठाई,बिके नहीं,झुके नहीं, हमारे उज्जवल भविष्य के लिए अपनी जवानी दांव पर लगा दी, छोटी छोटी उम्र में शहिद हो गए, उन्होंने ना भील देखा,ना भिलाला देखा,ना बारेला देखा ना गोंड देखा,ना प्रधान देखा, ना कोरकू देखा,ना गावित देखा,ना भारिया देखा,ना सहरिया देखा,ना कोई उपजाति देखी, अपने हक और अधिकार के खातिर संपूर्ण विश्व के आदिवासियों के संरक्षण के लिए लड़ते रहे,वह लोग सभी लड़ते-लड़ते मरे... वर्तमान समय में हमारे आदिवासी समाज में लगभग चालीस हजार सामाजिक संगठन आदिवासी समाज को सुधारने के लिए काम कर रहे हैं सभी एक दूसरे को ऊंचा नीचा दिखाने का प्रयास करते हैं,काम कम टांग ज्यादा खींच रहे हैं, बाल्टी में रखे दो केकड़ों की तरह ऊपर चढ़ रहे केकड़े की टांग नीचे वाला केकड़ा खींच रहा है, अपना संगठन सर्वोपरि मानकर दूसरे संगठन की बुराई करते हैं यह संगठनवाद की बीमारी हमारे पुरखों के समय नहीं थी। इसे खत्म करके विश्व के आदिवासियों को एक मंच पर आने की आवश्यकता है। न्यायिक और गैर न्यायिक दोनों व्यवस्थाओं में से स्थाई रूप से एक व्यवस्था का चयन करना होगा तभी हम अपने समाज और अस्तित्व को बचा पाने में सफल होंगे।आप भी जानते हैं, एक म्यान में दो तलवार संभव नहीं है। या तो राजनीति कर लो या फिर पारंपरिक रूढ़िवादी ग्रामसभा को मजबूत कर लो। हमें अपनी प्राकृतिक कुदरती ताकत को पहचानकर ,पुरखों की व्यवस्था /विचारधारा पर चलना पड़ेगा तभी काले अंग्रेजो की फर्जी न्यायिक व्यवस्था और षड्यंत्रकारी चंगुल से बच सकते हैं।'संयुक्त राष्ट्र संघ के अनुसार विश्व में 47.6करोड़ से अधिक आदिवासी रहते हैं जो 90 देशों में निवास करते हैं और 5000 विभिन्न संस्कृतियों का प्रतिनिधित्व करते हैं।'उक्त सभी सगाजनों को संगठनवाद पार्टीवाद, क्षेत्रवाद, जातिवाद को छोड़कर फेसबुक व्हाट्सएप की काल्पनिक दुनिया से बाहर निकल कर एकजुट होकर जमीनी स्तर पर काले अंग्रेज़ यानी अप्रवासी दीकूओ के खिलाफ लड़ने की सख्त जरूरत है। देश की सर्वोच्च न्यायालय यानी सुप्रीम कोर्ट ने 5 जनवरी 2011 के अपने ऐतिहासिक निर्णय में कहा था- " 19. Thus Bhils are probably the descendants of some of the original inhabitants of India known as the `aborigines' or Scheduled Tribes (Adivasis), who presently comprise of only about 8% of the population of India. The rest 92 % of the population of India consists of descendants of immigrants. Thus India is broadly a country of immigrants like North America. We may consider this in some detail.

India is broadly a country of immigrants "

उलगुलान जिंदाबाद💪
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✍️राकेश देवडे़ बिरसावादी

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