"केरल राज्य बनाम चंद्रमोहन्न,सुप्रीम कोर्ट,2004"(👉अध्यादेश 1975){👉अनुसूचित क्षेत्र(झारखंड राज्य)आदेश 2007}जोहार🙏🙏🙏(चलिए मिलकर आदिवासी समुदाय का जिम्मेदारी उठाये)👇👇👇" converted आदिवासी एक गैर आदिवासी है"👉ईसाई सिविल कोड(ईसाई,पारसी,यहूदी)👉हिन्दू सिविल कोड (हिन्दू,सिख,जैन और बौध्द)👉मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरियत लाॅ(Divine law)-:मुस्लिम 👇👇👇👉सिविल/पर्सनल लॉ के अंतर्गत कौन-कौन विषय आ सकते है👉शादी👉तालाक👉उत्तराधिकारी👉बच्चों का गोद👉maintenance 👉guardianship पारिवारिक झगड़ा इसके विषय का कानून है...👉जब भी पर्सनल लाॅ का मामलात होता है...एक साइड पक्ष के लिए खड़ी होती है.. अनु 25:-धार्मिक स्वाधीनता का अधिकार...अनु 26:- धार्मिक कार्यो के प्रबंधन का अधिकार...दूसरा साइड कुछ अनुच्छेद पर्सनल लॉ को चैलेंज करती है या गलत कहती है...अनु 14:-विधि के समक्ष समानता का अधिकार...अनु 15:-राज्य को जाति,धर्म,लिंग,मुलवंश और जन्म-स्थान के आधार पर विभेद निषेध है.. अनु 21:-ये व्यक्ति विशेष का अधिकार है...प्राण एवं दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण का अधिकार है...अनु 44:- समान नागरिक संहिता👉 इन दोनों के बीच के पक्षों को अनु 13 पारिभाषित करती है...इन दोनों के बीच का सेतु का काम करती है...अनु 13:- राज्य को मौलिक अधिकारों से असंगत कानून बनाने का निषेध है...👇👇👇👉केस दो तरह के होते है1:-सिविल केस2:- क्रिमिनल केस👇👇👇👉FIR दो जगह से किया जा सकता है... FIR:- first information report 1:- अपने पास के थाना से2:- जिला मजिस्ट्रेट:- हरेक जिलों में एक जिला मजिस्ट्रेट होता है👉केस दो तरह के होते है...1-:सिविल केस-:CPC 1908-:civil procedures code2-:क्रिमिनल केस👉IPC 1860-: Indian pinal code 👉CRPC 1973-: criminal procedures code 👇👇👇👉संविधान में अनु 20 और अनु 22 में वर्णित किया गया है👆👆👆"अनु 342:-एसटी(आदिवासी)👇👇👇👉आदिवासी-समुदाय का कस्टमरी लाॅ अनु 13(3)क के तहत आता है लेकिन इसे अनु 13(1),अनु 244(6) और अनु 371(क,च) के तहत वर्णित करना बनता है...जो भारत सरकार के किसी भी एक्ट/अधिनियम के तहत नहीं आती है...
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