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"खोलगांव जैसे छोटे से गांव में हाथ में किताब लेकर ग्वाल बकरी चराने जाने वाले मेरे जैसे काले कलूटे लड़के को हीरो बनाने वाले यानी हमारे जीवन को संवारने के लिए ईश्वरीय मां बाप, शिक्षक, भाई बहन, दोस्त, परिवार और समाज का योगदान सर्वोपरि होता है लेकिन इसके बावजूद अपवाद स्वरूप कुछ कर्मचारी अधिकारियों को छोड़कर बहुत सारे अनगिनत लोग ऐसे होते हैं जिन्हें इनसे कोई मतलब नहीं होता। उन्हें अपनी बीवी और टीवी प्लाट मकान से फुर्सत ही नहीं मिलती। लेकिन सच्चाई यह है कि समाज बचेगा तभी हम बचेंगे। सभी नौकरी पेशा भाइयों से विशेष आग्रह है जैसा भी हो जितना बन सकता हो ,अपनी कमाई का कुछ हिस्सा समाजहित में देवे और समाज के गरीब बच्चों को आगे बढ़ाने के लिए उन्हे प्रेरित करें। ऐसा मेरा व्यक्तिगत निवेदन है।"
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