जयस स्थापना दिवस (16 मई)

#jays
जय जोहार 
"उबलते हुए खून की रवानी है जयस,
इस देश की जवानी है जयस,
अब तक जो सोये हुए थे आदिवासी,
उनको जगाने की कहानी है जयस ।।"
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आदिवासी समाज की अंतिम सांस, वैचारिक क्रांति की घोतक, आदिवासी समाज के हर युवा के अंदर पीली क्रांति का जुनून रग रग में भरने वाली निस्वार्थ सेवार्थ उत्कृष्ट सामाजिक विचारधारा, जल जंगल जमीन संस्कृति रीति रिवाज  संवैधानिक अधिकारों को बचाने हेतु प्रयासरत एक मिशन , दबे कुचले गरीब असहाय मजदूर किसान की बुलंद आवाज़ , पुरे विश्व के आदिवासियो को एकजुट करने वाली एक बौद्धिक ताकत ,अपने स्वार्थ के लिए उपयोग करने तथा विरोधियो द्वारा राजनीतिक लांछन लगाकर मिटाने की कोशिश करने पर भी ना मिटने वाली अमिट स्याही ,संवैधानिक दायरे में रहकर काम करने वाली एक पुरखा सोच,समाजहित में रक्तदान, पर्यावरण संरक्षण, संवैधानिक जागरुकता, विश्व में शांति कायम हो , ग्लोबल वार्मिंग से बचाव हेतु रचनात्मक उल्लेखनीय कार्य करने वाले संगठन नहीं अपितु एक सामाजिक विचारधारा जयस स्थापना दिवस (16 मई) की आप सभी आदिवासी सगाजनों को ढेर सारी जोहार बधाई एवं शुभकामनाएं।"
:  राकेश देवडे़ बिरसावादी
//जब तक है जान जारी रहेगा बिरसावादी उलगुलान//

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