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*_आदिवासी समाज का प्रतिभाशाली एकलव्य ,संगीत सूरदास ,गीतकार ,संगीतकार , गायक अनिल पिपलाज ग्राम बड़वान्या जिला धार (मध्य प्रदेश)_*
*_"चरन कमल बंदौ मां प्रकृति व पुरखा राई।_*
*_जाकी कृपा पंगु गिरि लंघै, आंधर कों सब कछु दरसाई॥_*
*_बहिरो सुनै, मूक पुनि बोलै, रंक चले सिर छत्र धराई।_*
*_सूरदास मां प्रकृति व पुरखा करुनामय, बार-बार बंदौं तेहि पाई॥"_*
*_अर्थात जिस पर मां प्रकृति व पुरखा की कृपा हो जाती है, उसके लिए असंभव भी संभव हो जाता है।_* *_लूला-लंगड़ा मनुष्य पर्वत को भी लांघ जाता है। अंधे को गुप्त और प्रकट सबकुछ देखने की शक्ति प्राप्त हो जाती है। बहरा सुनने लगता है।_* *_गूंगा बोलने लगता है कंगाल राज-छत्र धारण कर लेता हे। ऐसे करूणामय मां प्रकृति व पुरखा की पद-वन्दना कौन अभागा न करेगा।_*
*_(शब्दार्थ :-राई= राजा। पंगु = लंगड़ा। लघै =लांघ जाता है, पार कर जाता है। मूक =गूंगा। रंक =निर्धन, गरीब, कंगाल। छत्र धराई = राज-छत्र धारण करके। तेहि = तिनके। पाई =चरण।)_*
*_आजकल शादी ब्याह में एक गीत बहुत धूम मचा रहा है वह संगीतमय गीत जहां भी बज रहा है वहां पर उपस्थित कोई भी व्यक्ति स्वयं को थिरकने से नहीं रोक पा रहा है। इस गीत को आदिवासी समाज के एक ऐसे एकलव्य ने लिखा व गाया है जो स्वयं दोनों आंखों से देख नहीं सकता या कहें आदिवासी समाज का वह सूरदास जो दोनों आंखों से देख नहीं पाने की स्थिति में भी अपनी प्रतिभा और काबिलियत से समाज में लोकगीतों के माध्यम से आदिवासी कुटुंब कबीले लोगों को नचा रहा है, झूमने पर मजबूर कर रहा है। मां प्रकृति तथा पुरखों का ऐसा आशीर्वाद है कि उसकी अंगुलियां केसियो पर ऐसे चलती है जैसे पटरी पर मेट्रो ट्रेन दौड़ रही हो, उसकी सुरीली लयबद्ध आवाज दिल को छू जाती है, अपनी बौद्धिक कल्पना से मन ही मन में उकेरे गए उसके गीत बेहद ही खूबसूरत व सुनने लायक है।_*
*_मैं बात कर रहा हूं ममतामई करुणामई यथाह भावनाओं से भरी संगीत की जननी आदिवासी संस्कृति के रक्षक आदिवासी समाज के एकलव्य संगीत सूरदास अनिल पिपलाज की जो ग्राम बड़वान्या तहसील डही जिला धार मध्य प्रदेश के मूल वासी हैं । वह बचपन से दोनों आंखों से देख नहीं सकते इसके बावजूद संगीत के प्रति दीवानगी ने उन्हें संगीत सम्राट बना दिया। उनके द्वारा लिखा व गाया गया गीत:_*
*_"म्हारी रंगरूपाली ड्रू... म्हारी रंगरूपाली बिलखी वो चवरै खेलू चूट जानुणी ज्यादा मा कोरिजे वो कमर खेलू चूट"_*
*_म्हारी सूरभरी जवानी रे, धोड़ दिने कपाणे जुवान्या ज्यादा मा कोरिजे रे मांडा पाणी दिस,_*
*_म्हारू जितेंद्र देवड़ा गांवे वो मछलगांव म्हारू गांव जानुणी ज्यादा मा कोरिजे वो मांडा पाणी दिस।_*
*_(आ हा हा हा क्या नाम है आपका ?_*
*_अरे पगली अनिल पिपलाज बड़वान्या वाले।)_*
*_जुवारमाता काई छै किन गई वा अली नी आवे काय_*
*_जुवानय तारा घुघरिया छमा छिमी वागे, जुवान्या तारी पावली टिरी टिरी वागे_*
*_मैलू तारा लाकड़ा उकणु हुई जासे,,,,,,,होव ते...._*
*_तू खाटला मा कसके ने ओढ़ी रूटू मोसके काई काम नी तूसे बोंणे मैलू तारा लाकड़ा।_*
*_दाहणा पण्या वाका ना बायर कोहे काका हया दाहणा आया काई काम कोरूं।_*
*_मैलू तारे खोलन्यू खुमण्या होई जासे।_*
*_जूता कपड़ा मा रही जाऊंगा जानू तारा बिना नी रहूंगा,_*
*होव ते.....*
*_क्या नाम है आपका_*
*_अरे पगली अनिल पिपलाज बड़वान्या वाले......._*
*जितेंद्र देवड़ा नाव वो म्हारू मछलगांव गांव छै.....*
*मछलगांव गांव छै ने खरगुण म्हारू जिलू छै।*
*माय बाप भाई बंद छुडी़ देवंग जुवान्या तारा बिना नी रहूंगा।*
*संदारे नी आवे शांति मिलन आवजी*
*शांति नी आवे संदारे मिलन आवजी*
*संदारे उठी न जुवान्या पाणी ने छाणी **छै , शांति जुवारे जुवान्या कपणा ना लफणा छै....दिन भर पतझड़ छै* *म्हारी जानू तारा बिना जरा नी गमे वा।*
*म्हारी रंगरूपाली बिलखी वो..........*
*खरगुण हाट जाता पान बीणो मीणो चावता*
*खरगुण मा जाता पान बीणो मीणो चावता*
*हाट बाजार जाता पान बीणो मीणो चावता*
*बारकी तारी राबड़ी ने वाकी तारी पागडी़*
*माणस्ये काजै ठोगे मैलू तारू देवड़्यू ...*
*बारकी तारी राबड़ी ने वाकी तारी पागडी़*
*माणस्ये काजै ठोगे मैलू तारू डेमण्यू ...*
*टुल्यू बाजार आवै मैलू तारा लाकड़ा।*
*मिर्ची रोटू खाय लूंगा दारू बिना जरा नी रहूंगा*
*कच्ची नी मिले तो पक्की बुलाय लावजी*
*कच्ची नी जणे तो पक्की बुलाय लावजू _*
*मिर्ची रोटू खाय लूंगा दारू बिना जरा नी रहूंगा*
*हासी हासी त.....*
*अनिल पिपलाज नाव वो म्हारू बडवान्यू गांव छै....*
*_बड़वान्यो का नाव बिको रयो गाना गावणे जरा नी रहूंगा।_*
*_पिपलाज तारू नाव बिकी रह्यै तारा बिना जरा नी रहूंगा।"_*
*_इस प्रकार शानदार जानदार यह आदिवासी बोली भाषा में बना यह लोकगीत 14 मिनट 23 सेकंड का है। आदिवासी समाज के आर्थिक रूप से सक्षम लोगों, विधायक /सांसदों /समाज सेवकों को अनिल पिपलाज जैसे प्रतिभाशाली गायको और गीतकारों को मदद करना चाहिए साथ ही उनके लिए अच्छा प्लेटफार्म तैयार करना चाहिए। चूंकि अनिल भाई देख नहीं सकता इसलिए यूट्यूब चैनल का सवाल ही नहीं उठता लेकिन कुछ युवा साथीयों ने उनके नाम 'ANIL PIPLAJ OFFICAL 'से यूट्यूब चैनल बनाया है जिस पर गीत अपलोड हो किए जाते हैं लिंक है : https://youtu.be/ufqq9jfFJj4 समस्त आदिवासी सगा जनों से आग्रह निवेदन है अनिल भाई के इस चैनल को अधिक से अधिक सब्सक्राइब करें ताकि यूट्यूब की तरफ से अनिल भाई को आर्थिक मदद मिल सके आपसे आत्मीय अपील करता हूं।
विश्लेषक:
✍️ *राकेश देवडे़ बिरसावादी*
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