बिरसावादी
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मां तुम सारी रात
क्यों महुए के गिरने का इंतजार करती हो?
क्यों नहीं पेड़ से ही
सारा महुआ तोड़ लेती हो ?
मां कहती है
वे रात भर गर्भ में रहते हैं
जन्म का जब हो जाता है समय पूरा
भोर, ओस में जब वे भीगते हैं धरती पर
हम घर ले आते हैं उन्हें उठाकर
पेड़ जब गुज़र रहा हो
सारी रात प्रसव पीड़ा से
बताओ, कैसे डाल हिला दें जोर से?
बोलो, कैसे तोड़ लें हम
जबरन महुआ किसी पेड़ से ?
हम सिर्फ़ इंतज़ार करते हैं
इसलिए कि उनसे प्यार करते हैं।।
🌳🌳जोहार माँ प्रकृति✊✊ जय आदिवासी
#tribalculture
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