"हमारे गृह जिले खरगोन की महेश्वर निवासी मूलतः
चित्तौड़गढ़ के भील कबीले से ताल्लुक रखने वाली हमारे आदिवासी समाज की शान मोनालिसा भोंसले की सादगी पर पुरा भारतीय मीडिया फिदा हो गया। मोना से अश्लील गानों पर डांस करने वाली लड़कियों को सीख लेनी चाहिए। वायरल होने के लिए आधे अधूरे कपड़े पहनकर नाचना तथा अश्लील हरकतें जरूरी नहीं है,जरुरी है सादगी। वह अपनी सादगी तथा खूबसूरत आंखों से पश्चिम निमाड़ की खुशबू प्रयागराज कुंभ में बिखेर रही है। निमाड़ के लिए गौरव का विषय है।"चरित्र के साथ खूबसूरती तो बहुत जगह देखने को मिलती है, मगर खूबसूरती, गरीबी, खुद्दारी ओर चरित्र के साथ बहुत कम देखने को मिलती हैं।मोनालिसा खानाबदोश आदिवासी जनजाति से हैं।कुंभ मेले में मोनालिसा अपनी खूबसूरत आंखे और मुस्कुराहट के लिए वायरल हो चुकी हैं.
मोनालिसा की खूबसूरती से साबित कर दिया है खूबसूरती रंग, जाति या किसी नस्ल की मोहताज नहीं है।1855 में भारत का प्रथम स्वाधीनता संग्राम आदिवासियों ने लड़ा था। 1857 नकली स्वाधीनता संग्राम है राजाओं और अंग्रेजों ने डरकर 1873 में "Criminal Tribes Act" बनाकर,
करोड़ों आदिवासी जनजातियों को अपराधी घोषित कर दिया. आज भी भारत में घुमंतू आदिवासी हाशिये पर पड़ा हुआ समुदाय है।मोनालिसा को शायद पता नही होता उसके परदादा और पूर्वजों ने जल जंगल जमीन के लिए अंग्रेजों से लोहा लिया था। मैं शूरवीर आदिवासियों को कोटि कोटि प्रणाम करता हूँ"
: राकेश देवडे़ बिरसावादी
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